प्राचार्य का संदेश -

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श्री विजेश कुमार

प्रिंसिपल

  • प्राचार्य की कलम से. . . . . . . ..

    भारत एक ऐसा देश है जो सदियों से ज्ञान का मार्ग सम्पूर्ण विश्व को प्रशस्त करता रहा है। 'भारत' शब्द की रचना अपने में अद्वितीय है। 'भा+रत्'  'भा' का अर्थ 'प्रकाश', 'रत्' का अर्थ 'रमे रहने वाला'। यह वे देश है जो सदैव ज्ञान के प्रकाश में रमा रहता है और इस ज्ञान के प्रकाश में रमने के लिए निमंत्रण सभी को मुक्त भाव से देता है।

    आचार्य एवं शिष्य परंपरा का स्वस्थ एवं सात्विक रूप हमारे यहाँ पर है। वैदिक युग से चलकर यह ज्ञान गंगा पौराणिक युग में अवगाहन कर वर्तमान युग में नव परिवर्तनों को आत्मसात् कर अविरल बह रही है। इस ज्ञान गंगा में ऋषि वशिष्ठ, ऋषि भारद्वाज, ऋषि वेदव्यास ने स्नान किया और इस परम्परा को आधुनिक युग में आदि शंकराचार्य, चाणक्य, कबीर, सूर, रैदास, गुरुनानक, से होकर महात्मा गांधी, कवि रविन्द्र, स्वामी विवेकानन्द, विनोद भावे, डॉ हर गोविन्द खुराना, सी. वी. रमन, डॉ ए. पी.जे.अब्दुल कलाम के साथ मिलकर अपने नवीन स्वरूप में वर्तमान में स्थापित हो चुकी है।

    वर्तमान युग परिवर्तन का युग है। प्रति पल बदलती दुनिया एवं नवीन अविष्कारों के कारण शिक्षा क्षेत्र में नवीन प्रतिमान स्थापित हो रहे हैं। आज की शिक्षा वैश्विक शिक्षा है। हमारा विद्यार्थी भारतीय शिक्षा पद्धति का अंग न होकर विश्व शिक्षा कक्षा का अंग है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अधिगम के क्षेत्र में बालक का इस प्रकार विकास करें कि वह वातावरण के साथ अघिगम प्रक्रिया में शामिल हो सके। हमारा उद्देश्य विद्यार्थी पाठ्य पुस्तक में वर्णित ज्ञान को आधार मानकर अनुभव जनित अधिगम की ओर अग्रसर कराना है।

    हमारा केन्द्रीय विद्यालय संगठन एवं केन्द्रीय विद्यालय मुरादाबाद इस पथ पर अग्रसर है। विद्यार्थियों को भविष्य में मिलने वाली संभावित चुनौतियों का पुर्वानुमान लगाकर हमारा विभाग विद्यार्थी को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। स्वस्थ प्रतियोगी भाव, मानवीय मूल्यों एवं नैतिक मूल्यों का सम्प्रेषण तथा एक ईमानदार एवं देशभक्त नागरिक बनाना हमारा उद्देश्य है। हमें राष्ट्र निर्माण में ऐसे मानव संसाधन को तैयार करना है जो राष्ट्रीयता  के साथ साथ विश्व नागरिक को भूमिका में अपना कौशल सिद्ध करें।

    हम सभी प्रयासरत् है। आपके (अभिभावक) सहयोग की आवश्यकता है। यह हम सभी का दायित्व है कि 21 वीं सदी का भारत हमारे विद्यार्थियों के सपनों का  भारत बनें। आईये, हमारे हाथ से हाथ मिलाइए।

    शुभकामनाओं सहित